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लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने का दावा करने वाले स्वास्थ्य विभाग की तबियत खराब, महज 3 महीने में ही हाफने लगा सिस्टम, आंबेडकर अस्पताल में ओपन हार्ट सर्जरी बंद, दर-दर भटक रहे मरीज ।

# प्रदीप पटेल | 04 Jul, 2021

रायपुर। लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने का दावा करने वाले स्वास्थ्य विभाग की तबियत इन दिनों खराब है, इस बात का अंदाजा राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल अंबेडकर अस्पताल की हालत देखकर लगाया जा सकता है। यहां मरीजों के इलाज के नाम जारी होने वाले पैसे की कमी हो गई है, जिसके चलते कई तरह के इलाजों को बंद कर दिया गया है। फंड की कमी के चलते ओपन हार्ट सर्जरी को महज 3 महीनों में ही बंद कर दिया गया, अंबेडकर अस्पताल में एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट में ओपन हार्ट सर्जरी 14 जनवरी को शुरू की गई है। लेकिन 14 मार्च के आते आते यह सुविधा हाफने लग गई। लिहाजा इसको तीन महीने में ही बंद करना पड़ गया है । इस सुविधा के बंद होने के चलते इलाज के लिए आने वाले मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मरीज अस्पताल तो पहुंच रहे है, लेकिन उन्हें फंड़िग के कमी होने का हवाला देकर वापस भेजा जा रहा है, ऐसे में मरीजों को आर्थिक परेशानी के साथ-साथ समय की हानि हो रही है ।

बिना इलाज के वापस लौटने को मजबूर है मरीज

बेमेतरा जिले के एक गांव से आए हार्ट मरीज के परिजनों ने बताया की हम पिछले 4 दिनों से रायपुर के मेकाहारा अस्पताल में आए हैं। लेकिन यहां इलाज नहीं हुआ तो आज वापस जाना पड़ रहा है, वही संतोषी नगर निवासी आना दीप जिनकी पत्नी सुलोचना दीप जिसको पथरी के साथ (स्टोन) व हार्ट की बीमारी है। जिन के इलाज के लिए वे अंबेडकर अस्पताल आए हुए है, लेकिन 4 दिन से डॉक्टर यहां वहां जाने की बात कह रहे है, और इलाज नही हो रहा है ।

डॉक्टरों ने झाड़ा पल्ला

इस मामले को लेकर कार्डियक विभाग के डॉक्टरों से जानकारी लेने के लिए संपर्क किया तो विभाग के डॉक्टरों और जिम्मेदारों ने पल्ला झाड़ दिया। डॉक्टर जिम्मेदार से बात करने और जिम्मेदार जवाब देने को तैयार नहीं हैं. ऐसे में एक बड़ा सवाल है कि आखिर मरीज इलाज के जाएं कहां ।

200 से अधिक मरीज लौटाए गए

14 जनवरी 2021 से रायपुर के अंबेडकर अस्पताल के एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट में ओपन हार्ट सर्जरी शुरू किया गया था। मगर अब यह बंद हो गई है, 1 मरीज में 1 लाख से ज्यादा का खर्च आ जाता है। एएसआई का सालाना बजट करीब साढ़े छह करोड़ रुपए का है। जो आने वाले मरीजों के दिल फेफेडे आदि सर्जरीओं पर खर्च होता है। इसकी राशि नहीं मिल पाने की वजह से यह सर्जरी का सारा कामकाज ठप पड़ गया है, 14 जनवरी को सर्जरी की सुविधा शुरू होने के बाद से 27 मार्च तक 10 लोगों की ओपन हार्ट सर्जरी की गई है। अब पिछले चार माह में 200 से अधिक मरीजों को लौटाए जा चुके हैं ।