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प्रभारी मंत्री के आगमन को लेकर उत्सुकता में कांग्रेसियों ने तोड़े सारे नियम कायदे, पूरे शहर में रैली, दूसरों के जान और कोरोना के साथ खेल रहा है शासन ।

# प्रदीप पटेल | 25 Jun, 2021

बिलासपुर। प्रभारी मंत्रियों में कांग्रेस सरकार के ढाई साल पूरे होने के बाद सरकार द्वारा प्रभारी मंत्रियों के प्रभार में फेरबदल किया गया है, जिसके साथ ही छत्तीसगढ़ की नादानी बिलासपुर का प्रभारी मंत्री के रूप में छत्तीसगढ़ शासन में राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल को चयनित किया गया है। प्रभारी मंत्री बनने के बाद पहली बार राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल बिलासपुर पहुंचने वाले हैं। जिसे लेकर कांग्रेस भवन में तैयारियों पूरी कर लिया मगर जिस तरह का हुजूम कांग्रेस भवन के बाहर इकट्ठा हुआ उसे देखकर लगता है, कि कांग्रेस सरकार और कांग्रेस के लोग उत्सुकता वर्ष कोरोना के खतरे को भूल गए हैं ।

जिले के सारे बड़े नेता कांग्रेस भवन में एकत्रित हो गए हैं, इसके साथ ही बड़ी संख्या में कांग्रेसी कार्यकर्ता और गांव से उठाकर लाए गए, लोग कांग्रेस भवन के हॉल में इकट्ठा है। ऐसे में सवाल उठता है कि जहां देश कोरोना महामारी की तीसरी लहर को लेकर चिंतित नजर आ रहा है, छत्तीसगढ़ में दूसरी लहर के दौरान मुसीबतें झेलने के बावजूद भी यहां के नेता और मंत्री सजग नजर नहीं आ रहे हैं या फिर उनको अपने स्वागत की और संबंधों की इतनी चिंता हो गई है कि वह लोगों की जान खतरे में डालने से भी परहेज नहीं कर रहे हैं।

छत्तीसगढ़ भवन एवं कांग्रेस भवन में सैकड़ों का खाना

एक तरफ छत्तीसगढ़ शासन एवं प्रशासन कोरोना के मद्देनजर आदेश जारी करती है कि शादी विवाह में केवल 50 लोगों की ही उपस्थिति जारी की जाए, अगर कहीं 50 से ज्यादा नजर आते है तो उन पर कार्यवाही होगी। वहीं राजनीतिक से लेकर सामाजिक रैलियों पर भी खुद प्रतिबंध लगाती है। उसके बाद अपने नियम को खुद ही छत्तीसगढ़ शासन एवं प्रशासन पालन किये बिना ही तोड़कर खूब धज्जियां उड़ाती है। ऐसे में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को अगर समझ नही तो कम से कम प्रभारी मंत्री जयसिंग अग्रवाल को तो समझ होनी चाहिए, कि वे कम से कम कोरोना काल के दौरान नियम कायदों का तो पालन करें। या फिर मंत्री जी खुद चाहते है कि थम चुके कोरोना को फिर से वापस लाकर फैलाया जाए। वैसे भी दोष इसमे कार्यक्रताओं की नही क्योंकि वे तो शासन की ओर से दिए गए जिम्मेदारियों का पालन ही कर रहे है, अगर वे अपने जिम्मेदारी से पीछे हटते है तो फिर आपस में इनके पार्टी द्वारा एवं बड़े नेताओं द्वारा मन मुटाव की जो नौबत आ जाती है। इसलिए मजबूरी में सबकुछ झेलकर इन्हें माहौल बनाकर सबका स्वागत करना पड़ता है ।