Breaking News

Banner

लॉकडाउन की वजह से रायपुर से बंगाल जा रहा था परिवार, कार को ट्रक ने मारी टक्कर, 7 साल के बेटे और पिता की मौत, मां समेत 5 घायल ।

# प्रदीप पटेल | 23 Apr, 2021

रायपुर। लॉकडाउन की वजह से राजधानी में रहने वाला सुमित अपने बेटे आयुष, पत्नी टीना और कुछ रिश्तेदारों के साथ अपने मूल निवास पश्चिम बंगाल के लिए रवाना हुआ। कार महासमुंद ही पहुंची थी कि सामने से आ रहे ट्रक ने इनकी गाड़ी को टक्कर मार दी। इनोवा कार बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई। ड्राइविंग सीट के बगल में बैठे सुमित और 7 साल के बेटे आयुष के सिर पर गंभीर चोट आई। चंद मिनटों में ही दोनों की मौत हो गई। गुरुवार की रात ये हादसा महासमुंद के सिंघोड़ा थाना इलाके के रूदेश्वरी मंदिर के सामने हुआ।

सुमित का भाई तापस भी पीछे दूसरी कार में अपने परिवार के साथ आ रहा था। उसने ये हादसा अपनी आंखों से देखा। घटना के फौरन बाद उसने डायल 112 टीम को कॉल किया। चंद मिनटों में पुलिस की पेट्रोलिंग टीम मौके पर पहुंची। घायलों को अस्पताल ले जाया गया। सरायपाली के सरकारी अस्पताल में सुमित और उसके बेटे को मृत घोषित कर दिया गया। कुछ देर तक घायलों के इलाज के बाद उन्हें अब रायपुर भेज दिया गया है। हादसे में सुमित की पत्नी टीना, भाई संजीत, सुमित के दो साले आदित्य और गोपाल मानना के अलावा इनोवा कार का ड्राइवर प्रभुदास घायल है।

ऐसे हुआ हादसा, मृतक के भाई की आंखों देखी

सुमित के भाई तापस जाना ने घटना की आंखों देखी स्थिति बताई। तापस ने कहा कि हम पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर जा रहे थे। हमने गांव जाने के लिए गाड़ी किराए पर ली थी। मैं उस समय सुमित की इनोवा कार के पीछे होंडा अमेज कार में अपनी पत्नी और बच्चों के साथ था। हम रूदेश्वरी मंदिर को क्रॉस कर रहे थे, तभी रॉन्ग साइड से सड़क पर ट्रक नजर आया। वो हमारी तरफ बढ़ रहा था, लगा कि सड़क पर जगह है वो निकल जाएगा, मगर उसने सामने से इनोवा को टक्कर मार दी। ट्रक की रफ्तार इतनी तेज थी कि हादसे के बाद ट्रक डिवाइडर के ऊपर चढ़ गई, अंधेरे का फायदा उठाकर ट्रक का ड्राइवर भाग गया। भाई सुमित और भतीजे के शरीर में कोई हरकत नहीं थी, पुलिस की मदद से मैंने उन्हें गाड़ी से बाहर निकाला।

ज्वेलरी शॉप में कारीगर था सुमित

तापस ने बताया कि हम पिछले 11 सालों से रायपुर में रह रहे हैं। मैं और सुमित टिकरापारा की एक ज्वेलरी शॉप में कारीगर थे। 9 अप्रैल से रायपुर में लॉकडाउन लग गया और हमारा काम बंद हो गया। परिवार में पैसों की तंगी थी, हमने गांव जाने का फैसला किया था। गांव में खेत है, उसी में काम करके परिवार के लिए दो वक्त की रोटी जुटा लेते। पिछले बार भी लॉकडाउन में हमें गांव जाना पड़ा था। बाद में हम लौट आए थे।